चाय के बागानों से उपज़ी बेहतरीन चाय स्पिक्टेक्स इंटरनेशनल की पेशकश...

Saturday, January 28, 2012

चाय का उत्पादन तथा चाय की किस्में...



चाय कैमेलियासिनेसिस नामक पौधे से मिलती है, इसका वैज्ञानिक नाम थियौसिनेसिस है। परंतु प्रत्येक प्रांत मे उगने वाली चाय की किस्में अलग-अलग होती है। प्रांत की जलवायु तथा मिट्टी, चाय की महक व स्वाद में परिवर्तन करती है। जैसे दार्जीलिंग की चाय एक मीठा सा कोमलता का अहसास जगाती है। आसाम की चाय कड़क स्वाद और चुस्ती के लिये दुनिया भर में मशहूर है। वैसे ही काँगड़ा की हरी चाय औषधी के रूप में जानी जाती है। चीन की ऊलोंग टी डिज़ाइनर चाय के रूप में भी अपनी अलग पहचान बनाये हुए हैं
चाय की पत्तियों का आकार व उनके उत्पादन की विधि ही नही चाय की पत्तियों का
तोड़ना-सुखाना भी चाय के गुणों में अंतर करता है।
आजकल बाज़ार में ऑर्गनिक चाय का भी चलन बहुतायात से है। ज्यादातर ऑर्गनिक चाय की खरीदारी फ़्रांस,जर्मनी,जापान,अमरीका तथा ब्रिटेन द्वारा की जाती है।
अनुभवी टी टेस्टर्स के द्वारा चाय को छूकर,चखकर,उसकी पत्तियों का रंग देख कर और उसकी महक से गुणवत्ता का पता लगाया जाता है।



चाय निर्यातक स्पाईटैक्स कम्पनी के निर्माता पवन चोटिया कहते है कि बेहतरीन चाय की जाँच उसके लीकर से की जा सकती है। जिसमें सभी अलग-अलग किस्म की चाय पत्ती ढक्कन लगे बर्तन में कुछ मात्रा में डाल दी जाती है। इसके बाद उसमें उबलता हुआ पानी डाल कर ढक दिया जाता है। दो मिनट बाद चाय के रंग,खुशबू एवं स्वाद द्वारा चाय का पता लगाया जा सकता है।
मुख्यतःचाय चार ही प्रकार की होती है ग्रीन टी, ब्लैक टी, व्हाइट टी तथा ऊलोंग टी।


ग्रीन टी:  इसे 5% से 15 % तक ऑक्सिडाईज़ किया जाता है। भारत,चीन तथा जापान में चाय की क्वालिटी देखकर ही ग्रेडिंग की जाती है। चीन में ग्रीन पियोनी, ड्रेगन पर्ल, ड्रेगन वेल, जैस्मीन, पर्ल इत्यादि,जापान में सेन्चा, माचा, गेकुरो आदि तथा भारत में चीन के समान ही ग्रेडिंग की जाती है। ग्रीन टी एंटी-एजिंग के साथ-साथ एंटी-ऑक्सीडेंट का काम भी करती है। इसे औषधी के रूप में प्रयोग में लिया जाता है। इससे
कहवा,हर्बल टी तथा आर्गेनिक टी भी तैयार की जाती है।
यह कॉलेस्ट्रोल तथा वजन को
नियंत्रित करने,गले के संक्रमण तथा हृदय रोग के लिये उपयोगी है। ग्रीन टी में
पॉलीफ़िनोल्स होते है,जो दाँतों को केविटी से बचाते हैं।इसके अलावा महिलाओं में
गर्भाशय कैंसर, पेट कैंसर में भी लाभदायक है। इसमें कैफ़िन की मात्रा बहुत कम होती
है, अतः रात में भी पी सकते हैं।


ब्लैक टी--- यह कड़क स्वाद तथा कड़क खुशबू वाली चाय है।
इसे चीन में रेड टी के नाम से जाना जाता है,
इसे आम चाय भी कहा जाता है ।जो चीनी तथा दूध के साथ मिला कर बनाई जाती है। इसे गर्म व बर्फ़ डाल कर दोनो तरह से प्रयोग में लिया जाता है। इसमें कुछ विभिन्न प्रकार के प्राकृतिक फ़्लेवर मिला कर फ़्लेवर टी के रूप में बनाया जाता है।जैसे,--जिंजर, रोज़, चोकोलेट, जस्मीन,स्ट्राबेरी, कार्डेमम, बनाना, ऑरेंज, लेमन, मंगो, एप्पल, मिंट, तुलसी, पीच सिनेमोन, अर्ल ग्रे आदि फ़्लेवर्ड चाय आजकल मार्केट में उपलब्ध है। यह पूरी तरह से फ़रमेंटेड होती है। इसे दो तरह से तैयार किया जाता है। पहली प्रक्रिया में चाय  की पत्तियों को सी.टी.सी. (कट,टियर,कर्ल) प्रोसेस के द्वारा तैयार किया जाता है। इससे निम्न कोटि
की चाय तैयार होती है। दूसरी प्राक्रिया ओर्थोडोक्स कहलाती है। इसके ऑक्सिडेशन में
एक नियंत्रित तापमान तथा नमी का प्रयोग किया जाता है। यह प्रक्रिया हाथ व मशीन के द्वारा की जाती है। इस दौरान पत्तियां रोल हो जाती हैं। अब चाय को तीन श्रेणियों
में किया जाता है। डस्ट टी--ज्यादातर कैटरिंग में  कड़क चाय के रूप में प्रयोग की
जाती है।फ़ैनिंग टी--ये निम्न कोटि की चाय होती है, जो टी बैग बनाने के काम
आती है।व्होल लीफ़—यह उच्च गुणवत्ता की चाय है।




इसके बाद चाय विशेषज्ञो द्वारा चाय की गुणवत्ता को ध्यान में रख कर ग्रेडिंग होती है---
१--ब्रोकन ऑरेंज पिको (BOP)-- इसमें चाय के छोटे-बड़े सभी तरह के पत्ते होते हैं।
२--ऑरेंज पिको(OP)---इसमें चाय के
पूरे पत्ते को बिना कली के तोड़ा जाता है।
३--फ़्लावरी ऑरेंज पिको(FOP)---
इसमें सभी चाय की पत्तियां फूलों के साथ होती हैं।
फ़्लावरी ऑरेंज पिको भी दो तरह की होती है।
१--गोल्डन फ़्लावरी ऑरेंज पीको(GFOP)---इसमें पत्तियों पर सुनहरे दाने होते हैं, जो इसकी  गुणवत्ता को और भी निखार देते हैं।


२---टिप्पी गोल्डन फ़्लावरी ऑरेंज पीको(TGFOP)--इसमें चाय की कलियां और पौधों की दो ऊपर वा्ली पत्तियां शामिल होती हैं
इसके भी दो वर्ग होते हैं।


१--फ़ाइन टिप्पी गोल्डन फ़्लावरी
ऑरेंज पीको(FTGFOP)
२---सुपर फ़ाइन टिप्पी गोल्डन
फ़्लावरी ऑरेंज पीको। (SFTGFOP)
व्हाइट टी--- यह सबसे कम प्रोसेस्ड
टी है।इसमें कैफीन सबसे कम और एंटी
-ऑक्सिडेंट सबसे ज्यादा होते हैं।
यह कैंसर से बचाती है। तथा हड्डियों को मजबूत करती है। इसका
उत्पादन बहुत कम होता है।
ये साल में वसंत ऋतु के आरम्भ मे दो दिन तोड़ी जाती हैं।इसके अंतर्गत आती हैं सिल्वर निडल व्हाइट, व्हाइट पिओनी,लोंग लाइफ़ आइब्रो,ट्राइब्यूट आइब्रो आदि।
सिल्वर निडल व्हाइट टी- ताजा कलियों को हाथ से तोड़ा जाता है। ये कलिया चारों तरफ़ से सफ़ेद बाल जैसी रचना से ढकी होती है। व्हाइट टी को पानी में डालते ही बहुत हल्का सा कलर आता है, व इसका हल्का मीठा स्वाद शरीर को ताज़गी देता प्रतीत होता है।


व्हाइट पिओनी टी- इसका उत्पादन चीन में होता है। इसमें बड्स के साथ कोमल पत्तियों को भी तोड़ा जाता है। इसका स्वाद सिल्वर निडल टी से थोड़ा कड़क और रंग भी थोड़ा ज्यादा होता है।
लोंग लाईफ़ आइब्रो —यह सिल्वर निडिल,तथा पिओनी टी के बाद बची हुई पत्तियों से प्राप्त होती है। यह निम्न कोटि की चाय है।
ट्राइब्यूट आइब्रो—यह सबसे कम कीमत की व्हाइट टी की किस्म है जो विशेष प्रकार की झाड़ियों से प्राप्त की जाती है।
ऊलोंग टी---यह सेमी फ़रमेंटेड टी है।जिसे कुछ अधिक या कुछ कम ऑक्सिडाइज़
करके डिजाईनर बनाया जाता है। यह कुछ हिस्से से हरी तथा कुछ हिस्से से ब्लैक होती
है। चाय की यही विशेषता इसके स्वाद में परिवर्तन करती है। यह पेट के लिये लाभदायक । ग्रीन टी की तरह ही इसमें भी एंटिऑक्सिडेंट होते है। स्वाद में ही ग्रीन टी के समान है वरन यह भी हमारे शरीर की अनेक रोगों से रक्षा करती है।


चाय के  छोटे से पौधे ने सम्पूर्ण विश्व में अपनी पहचान बना ली है। इसकी हर घूँट के साथ अहसास होता है- सुकून,ताजगी और सेहत भरी जिंदगी का




7 comments:

  1. आज 29/01/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर (सुनीता शानू जी की प्रस्तुति में) लिंक की गयी हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  2. बहुत ही उपयोगी और ज्ञानवर्धक जानकारी।


    सादर

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  3. bahut achchi jankari deti hui post.

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  4. चाय की पत्तियों का कमाल .. कितनी मेहनत और वक्त लगता है चाय को अलग अलग तरह से तैयार करने में ... और हम हैं कि झट पानी में उबाल कर दूध शक्कर डाल कर फटाक से पी जाते हैं ... अच्छी जानकारी मिली ..

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  5. halchal se yahan aakar bahut achchha laga.
    chay ki chahat jaga di aapne sundar jaankari
    prastut karke.Pawan ji aapka naam upar neeche dekh,
    Sunita ji ko naman karne ko dil chah raha hai.

    unke shabd yaad aa rahe hain ' अपुन का तो पेशा ही ऎसा है। बस जरा आदत है मुस्कुराने की थोड़ा गुनगुनाने ki.

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  6. kya almora me chay ka bagan ho sakta he

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  7. बहुत ही अछि जानकारी मिली आज

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